aman akshar kavita, aman akshar poetry, गीतकार अमन अक्षर, की चर्चित प्रेम कविताएं

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aman akshar kavita नमस्कार दोस्तों- अमन अक्षर, आज के दौर के सबसे चर्चित युवा गीतकारों में से एक हैं। अमन अक्षर, का असली नाम अमन कुमार दलाल, है। अक्षर नाम इन्हें जाने-माने कवि, डॉक्टर कुमार विश्वास, ने दिया था।

अमन अक्षर अपने प्रेम गीतों और कविताओं में शुद्ध हिंदी शब्द , काव्य और पठन के कारण- गोपालदास नीरज,  कुंवर बेचैन, कुमार विश्वास, बालकवि बैरागी, जैसे देश के तमाम बड़े कवियों के साथ मंच साझा कर चुके हैं।

अपनी कविताओं को जब अमन अक्षर, अपनी मधुर आवाज में जाते हैं, तो सुनने वाले को लगता है, जैसे कि वह उनके विचारों को गा रहे हैं। अमन अक्षर के शब्द सब की भावनाए को छू जाते है

तो दोस्तों पेश है अमन अक्षर की लिखी कुछ मशहूर कविताएं..aman akshar poetry in hindi, aman akshar geet


अमन अक्षर के कुछ चर्चित गीत





    भाग्य रेखाओं में

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    भाग्य रेखाओं में तुम कहीं भी न थे
    प्राण के पार लेकिन तुम्ही दीखते।
    सांस के युद्ध में मन पराजित हुआ,
    याद की अब कोई राजधानी नहीं प्रेम तो जन्म से ही प्रणयहीन है,
    बात लेकिन कभी हमने मानी नहीं ,
    हर नए युग तुम्हारी प्रतीक्षा रही,
    हर घड़ी हर समय से अधिक बीतते।
    भाग्य रेखाओं में तुम कहीं भी न थे
    प्राण के पार लेकिन तुम्ही दीखते।
    इक तरफ आस के कुछ दीए जल उठे,
    इक तरफ मन विदा गीत गाने को है। प्रिये इस जन्म भी कुछ पता ना चला,
    प्यार आता है या सिर्फ जाने को है,
    जो सहज जी गए तुम हमारे बिना,
    हम वो जीवन तुम्हारे ही संग सीखते भाग्य रेखाओं में तुम कहीं भी न थे
    प्राण के पार लेकिन तुम्ही दीखते।

    राम गीत (aman akshar poetry on ram)



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    सारा जग है प्रेरणा प्रभाव सिर्फ राम है भाव सूचियाँ बहुत हैं भाव सिर्फ राम हैं. राजपाठ त्याग पूण्य काम की तलाश में तीर्थ खुद भटक रहे थे धाम की तलाश में ना तो दाम ना किसी ही नाम की तलाश में राम वन गये थे अपने राम की तलाश में आप से ही आपका चुनाव सिर्फ राम हैं भाव सूचिया बहुत हैं भाव सिर्फ राम हैं. ढाल में ढले समय की शस्त्र में ढले सदा सूर्य थे मगर वो सरल दीप से जले सदा ताप में तपे स्वयं ही स्वर्ण से गले सदा राम ऐसा पथ है जिसपे राम ही चले सदा दुःख में भी अभाव का अभाव सिर्फ राम हैं भाव सूचिया बहुत है भाव सिर्फ राम हैं ऋण थे जो मनुष्यता के वो उतारते रहे जन को तारते रहे तो मन को मारते रहे इक भरी सदी का दोष खुद पर धारते रहे जानकी तो जीत गई राम तो हारते रहे दुःख की सब कहानियाँ हैं घाव सिर्फ राम हैं भाव सूचिया बहुत है भाव सिर्फ राम है सब के अपने दुःख थे सबके सारे दुःख छले गये वो जो आस दे गये थे वही सांस ले गये कि रामराज की ही आस में दिए जले गये रामराज आ गया तो राम ही चले गये हर घड़ी नया-नया स्वभाव सिर्फ राम हैं भाव सूचिया बहुत हैं भाव सिर्फ राम है जग की सब पहेलियों का देके कैसा हल गये लोग के जो प्रश्न थे वो शोक में बदल गये सिद्ध कुछ हुए ना दोष दोष सारे टल गये सीता आग में ना जली राम जल में जल गये जानकी का हर जनम बचाव सिर्फ राम है भाव सूचिया बहुत हैं भाव सिर्फ राम है


    राम जानकी गीत

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    जो हैं इस कथा के प्राण, उनका प्राण जानकी राम एक सत्य जिसका हैं प्रमाण जानकी पुण्य एक था मगर थे पुण्य के घड़े अलग युद्ध एक था मगर दोनों ही लड़े अलग जो न थे किसी के राम, राम थे खड़े अलग जानकी के राम, राम से भी थे बड़े अलग इस कथा से है बड़ा अलग विधान जानकी राम एक सत्य जिसका हैं प्रमाण जानकी धर्म की कथा को जिसने मर्म एक नया दिया अपने साथ राम को भी राम में रमा दिया जानकी ने इसको अर्थ धर्म से बड़ा किया राम की कथा को, प्रेम की कथा बना दिया भावना से भी अधिक है अर्थवान जानकी राम एक सत्य जिसका हैं प्रमाण जानकी इसमें क्या नया है लाख तर्क जो बुने गए तुमको लग रहा है सिर्फ राम ही सुने गए एक सरल सी बात जिसके अर्थ अनसुने गए जानकी ने हां कहा तो राम जी चुने गए शब्द-शब्द अर्थ-अर्थ स्वाभिमान जानकी
    राम एक सत्य जिसका हैं प्रमाण जानकी प्रीत का नया ही रूप गढ़ रही थी जानकी पीछे-पीछे चल के आगे बढ़ रही थी जानकी जैसे मंदिरों की सीढ़ी चल रही थी जानकी राम लिख रहे थे राम पढ़ रही थी जानकी राम जिसके हो गए सहज सुजान जानकी
    राम एक सत्य जिसका हैं प्रमाण जानकी

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    इक और नई कहानी (aman akshar poetry lyrics)


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    इक और नई कहानी
    दुनिया हम दोनों में ढूंढेगी हम इस जीवन में भी
    अपना प्यार सफल न कर पाए
    आंसू अपने सपनों का
    जब शीशमहल न हो पाए इक दूजे की खातिर दोनों
    फिर पागल न हो पाए
    तुम इतने प्यारे थे तुमसे
    पूरी दुनिया सरल हुई हम इतने मुश्किल थे जो
    तुमसे भी हल न हो पाए
    किस्मत ने हम दोनों को
    हर युग में ही मिलवाया है हम अपना मिलना लेकिन
    हर बार सफल न कर पाए
    धूप तुम्हारे रूप की कैसे
    दो आँखों में भर पाते कैसे अम्बर के प्रश्नों का
    धरती पर उत्तर पाते
    हम तो शापित प्रेमी हमको
    न कोई अधिकार मगर जादूगर भी इस दुनिया को
    तुम जैसी न कर पाते
    तुम्हें अमरता स्वर्ग की थी
    और हमें धरा पर मरना था यूँ फिर सपनों का अपने
    संसार सफल न कर पाए


    ये तुम्हारी गली का सरल रास्ता


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    ये तुम्हारी गली का सरल रास्ता, हमसे पूछो तो सबसे कठिन राह है लाख विश्वास हमनें संभाले मगर एक संदेह जाते ज़माने लगे हमको जीवन के दिन थे बनाने मगर, हम यहाँ रोज़ रातें कमाने लगे ख़ुद से कोई वचन जो निभाया नहीं, इक तुम्हारे वचन का ही निर्वाह है चंद कदमों की दूरी के इस फेर में वक़्त ने रोज़ मीलों चलाया हमें, तुम प्रतीक्षा के वो मौन संवाद थे जिसने दुनिया की भाषा बनाया हमें हम तो यूँ ही निकल आये थे खो गये, मन मगर अपनी मर्ज़ी से गुमराह है


    ऐ नदी अभी हम चलते हैं (aman akshar poetry in hindi)


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    ऐ नदी अभी हम चलते हैं,
    फिर कभी बैठ कर दोनों बतियायेंगे 

    कुछ दिये साथ में हम लिए आएंगे,
    चाहते हैं तुम्हारी लहर संग बहे
    बस यही रास्ता प्रेम तक जाएगा
    एक नए प्यार की मन्नतें ये कहें 

    अर्थ जो भी सपन बन नयन में रहे
    सब तुम्हारी ही तो गोद में आएंगे
    ऐ नदी अभी हम चलते हैं,

    फिर कभी बैठ कर दोनों बतियायेंगे

     तुमने तोड़े कई हैं घरोंदे मेरे
    आस और स्वप्न के ना महल तोड़ना
     हमने छोड़ी पुरानी सभी आदतें 
    तुम भी अपनी सभी आदतें छोड़ना

     इस जन्म हैं प्रणय गीत गाने बहुत
    फिर किसी जन्म में हम तुम्हें गाएंगे
    ऐ नदी अभी हम चलते हैं,
    फिर कभी बैठ कर दोनों बतियायेंगे 

    तट तुम्हारे सभी सरहदों से बंधे
    हमको भी तो किसी तट का बंधन मिले
    देह के इस नगर अपना जी ही नहीं
    मन के देहात में मन सा जीवन मिले

     हमने जो भी कहा मित्रवत कह दिया
    फिर कभी इसका मतलब भी समझाएंगे 
    ऐ नदी अभी हम चलते हैं,
    फिर कभी बैठ कर दोनों बतियायेंगे


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    हर पीड़ा पर भारी होगा


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    हर पीड़ा पर भारी होगा सुख वो तुम्हारे होने का तुमसे बंध जाने का और फिर बंधन सारे खोने का

    मिट्टी होती दुनिया अपनी राजमहल हो जाएगी प्रेमी हो या साधु हो ये दुविधा हल हो जाएगी केवल गीतों में ही सुनकर दुनिया अपनी कायल है तुमको मेरे संग जो देखेगी पागल हो जाएगी
    मरती आंखों को मिल जाए मौसम हंसने रोने का तुमसे बंध जाने का और फिर बंधन सारे खोने का इतना एकाकी जीवन बस दूर से सुंदर लगता है प्यार में अपना रोना भी हंसने से बेहतर लगता है यक्ष सरीखी दुनिया में इस प्रश्न के जैसे जीवन का तुम और मैं ही एक उत्तर हैं ऐसा अक्सर लगता है
    प्यार अकेला ही नियम हो संबंधों के बोने का तुमसे बंध जाने का और फिर बंधन सारे खोने का
    हर पीड़ा पर भारी होगा सुख वह तुम्हारे होने का तुमसे बंद जाने का और फिर बंधन सारे खोने का

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    तुम होते तो इस दुनिया में रहना और सरल होता (aman akshar ki kavita)


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    aman akshar tum hote to is duniya me

    साथ किसी के चल कर रस्ता सुंदर तो हो जाता है सपनों के सुस्ताने भर को एक घर तो हो जाता है एक उदासे तन को सुख का जेवर तो हो जाता है साथ किसी का पाकर जीवन बेहतर तो हो जाता है तुम होते तो इन बातों को कहना और सरल होता तुम होते तो इस दुनिया में रहना और सरल होता हम अनुमानित सात बरस तक कदम-कदम पर साथ रहे जनम-जनम संग रहने के वचनों के दम पर साथ रहे भोले-भाले अर्थों वाली हर एक कसम पर साथ रहे कुछ भी साथ नहीं था फिर भी हम हम-दम पर साथ रहे तुम बुनियाद बने रहते तो ढहना और सरल होता तुम होते तो इस दुनिया में रहना और सरल होता हम दोनों एक-दूजे के पहले-पहले संभल थे संग-संग ऐसे रहते जैसे हम ही संगम के जल थे लेकिन अपने साथ हुए हम सबसे बुनियादी चले थे सबको पागल कहते थे पर हम दोनों ही पागल थे पागल ही रहते तो खुद को सहना और सरल होता तुम होते तो इस दुनिया में रहना और सरल होता



    जीवन तेरा जीवन मेरा


    जीवन तेरा जीवन मेरा
    इसका कौन चितेरा संघर्षों की बेला है
    सुख और दुख का खेला है कभी है साथ तुम्हारे
    कभी एकाकी सा मेला है क्षण-क्षण हर क्षण रोया ये मन
    बनकर मीरा, कबीरा
    जीवन तेरा जीवन मेरा
    इसका कौन चितेरा निश्चल जल सा ये अविरल सा
    बहता जाए कल-कल कभी झरनों से कभी नयनों से
    झरता जाए पल-पल प्राणों की अपनी ही व्यथा है
    झर जाना जीवन की प्रथा है कभी है अनुबंध बरस के
    कोई क्षण भर ही ठहरा
    जीवन तेरा जीवन मेरा
    इसका कौन चितेरा


    इतना आगे निकल आएंगे


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    इतना आगे निकल आएंगे प्यार में सोचते भी न थे जानते भी न थे बूंद के भाग्य में है समंदर लिखा प्यास का भाग्य लेकिन है पानी नहीं जिसको देखे बिना उम्र ही काट दी उसको देखे बिना मौत आनी नहीं एक दुनिया जहां प्यार हो ही नहीं सोचते से भी न थे मानते भी न थे इतना आगे निकल जाएंगे प्यार में सोचते भी न थे जानते भी न थे सुख का संसार ना सुख का आधार है दुख की लेकिन कोई तो कसौटी रहे भाग्य रेखा में घर प्रीत का घर ना हो जीने की फिर वो रेखा भी छोटी रहे जिंदगी से अधिक प्यार को प्यार से रोकते भी न थे लाँघते भी न थे इतना आगे निकल जाएंगे प्यार में सोचते भी न थे जानते भी न थे


    हम समय से पूछते हैं जिंदगी में (aman akshar poems)


    कितना अलग है, कितना अलग है कितना अलग है, कितना अलग है हम समय से पूछते हैं जिंदगी में जीना मरना प्यार में कितना अलग है याद ने जलयान आंखों में उतारे रोशनी ने आंसुओं के घर सवाँरे सिसकीयों ने आह को इक स्वर दिया फिर गीत से जुड़कर हुए सब और प्यारे सूखते कंठों ने पूछा गीत गाना रूप से सिंगार से कितना अलग है हम समय से पूछते हैं जिंदगी में जीना मरना प्यार में कितना अलग है आत्मा का यक्ष अक्सर पूछता है ये बदन किस द्वार जाकर छूटता है हम यही कहते हैं ऐसे प्यार में छूटने से पहले सब कुछ टूटता है वह हठीला यक्ष है फिर पूछता है मोह मृत्यु द्वार से कितना अलग है हम समय पर पूछते हैं जिंदगी में जीना मरना प्यार में कितना अलग है


    भान तुमको न था

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    भान तुमको न था ना हमें ही रहा या तो तुमने सुना या तो हमने कहा बींध तुम भी गए जाने पीर में भीग हम भी गए आंख भर नीर में यूं तो सब कुछ हुआ किंतु कुछ ना हुआ द्रोपदी से रहे वक्त के चीर में गौड़ हम हो गए प्यार इतना बहा या तो तुम ने सुना या तो हम ने कहा रतजगे ख्वाब हैं नींद सोई नहीं हमने पीड़ा भी मन में रोई नहीं तुमको हम जान ले हमको तुम जान लो और जग में हमारा है कोई नहीं अनमनी इक नदी नें पूरा सागर सहा या तो तुमने गुना या तो हमने कहा




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    8 Comments

    1. बहुत उम्दा लेख

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    2. Aman akshar behtarin geet Sajha karne ke liye aapka dhanyvad

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    3. अमन अक्षर एक बहुत ही बेहतर उभरते हुए गीतकार है उनके गीतों को साझा करने के लिए आपका धनयवाद अजय पांडेय जी

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    4. Sir aman akshar ki budhi mai kavita bhi post kar dijiye please

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