कुमार विश्वास के 60 बेहतरीन मुक्तक

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kumar vishwas shayari in hindi नमस्कार दोस्तों- आज का यह लेख कुमार विश्वास जी की कविताओं पर आधारित है कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी 1970 को (उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के) पिलखुआ गांव में हुआ था

कुमार विश्वास जी के पिता उनको इंजीनियर बनाना चाहते थे, परंतु कुमार जी का मन वहां नहीं लगा तो उन्होंने अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोड़ दिया उसके बाद विश्वास जी ने साहित्य में स्नातकोत्तर किया

कुमार विश्वास जी आज के समय के सबसे व्यस्ततम कभी हैं पगली लड़की, कोई दीवाना कहता है, इनकी प्रमुख कृतियां हैं विश्वास जी की कविताओं और गीतों को आज युवा पीढ़ी द्वारा बहुत पसंद किया जाता है

तो आइए पढ़ते हैं kumar vishwas poetry in hindi


kumar vishwas famous poem in hindi

 नजर में 'शोखीयां" लब पर 'मोहब्बत' का तराना है,
 मेरी उम्मीद की जद में अभी सारा जमाना है|
 कई जीते हैं दिल के देश पर मालूम है मुझको,
 सिकंदर हूं मुझे एक रोज खाली हाथ जाना है|




  
उसी की तरह मुझे सारा जमाना चाहे,
  वह मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे|
  मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा,
  यह मुसाफिर तो कोई ठिकाना चाहे |    

kumar vishwas motivational quotes in hindi
कुमार विश्वास की शायरी इन हिंदी

  
 जिस्म का आखिरी मेहमान बना बैठा हूं,
   एक उम्मीद का उन्वान बना बैठा हूं|
   वह कहां है यह हवाओं को भी मालूम है,
   एक बस में हूं जो अनजान बना बैठा हू|



    हमने दुख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है,
   और उदासी के पंजों से हंसने का सुख छीना है|
   मान और सम्मान हमें ए याद दिलाते हैं पल पल,
  भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है|



    पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार क्या करना,
   जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना|
   'मोहब्बत' का मजा तो डूबने की कशम-कश में है,
  जो हो मालूम गहरायी तो दरिया पार क्या करना



  सदा तो धूप के हाथों में ही परचम नहीं होता,
 खुशी के घर में भी बोलो कभी क्या गम नहीं होता|
 फकत एक आदमी के वास्ते जग छोड़ने वालों,
 फकत उस आदमी से ये जमाना कम नहीं होता|



    बताएं क्या हमें किन किन सहारो ने सताया है,
   नदी तो कुछ नहीं बोली किनारों ने सताया है|
  सदा से शूल मेरी राह से खुद हट गए लेकिन,
  मुझे तो हर घड़ी हर पल बहारों ने सताया है|



   ना पाने की खुशी है कुछ ना खोने का ही कुछ गम है,
   ये 'दौलत' और 'शोहरत' सिर्फ कुछ जख्मों का मरहम है|
  अजब सी कशमकश है रोज जीने रोज मरने में ,
  मुकम्मल जिंदगी तो है मगर पूरी से कुछ कम है|



      
कोई मंजिल नहीं जंचती, सफर अच्छा नहीं लगता,
     अगर घर लौट भी आऊं तो घर अच्छा नहीं लगता|
    करूं कुछ भी मैं अब दुनिया को सब अच्छा ही लगता है,
    मुझे कुछ भी तुम्हारे बिन मगर अच्छा नहीं लगता|



badalne ke to in aankho ke manzar kam nahi badalne
kumar vishwas famous shayari in hindi

    बदलने को तो इन आंखों के मंजर कम नहीं बदले,
    तुम्हारी याद के मौसम हमारे गम नहीं बदले|
   तुम अगले जन्म में हम से मिलोगी तब तो मानोगी,
   जमाने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले|



     मेरे जीने मरने में, तुम्हारा नाम आएगा
     मैं सांस रोक लू फिर भी, यही इलज़ाम आएगा
     हर एक धड़कन में जब तुम हो, तो फिर अपराध क्या मेरा
    अगर राधा पुकारेंगी, तो घनश्याम आएगा



     तुम्हारा ख़्वाब जैसे ग़म को अपनाने से डरता है
     हमारी आखँ का आँसूं , ख़ुशी पाने से डरता है
    अज़ब है लज़्ज़ते ग़म भी, जो मेरा दिल अभी कल तक़
    तेरे जाने से डरता था वो अब आने से डरता है


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kumar vishwas love shayari in hindi
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    बहुत बिखरा बहुत टूटा मगर मैं सह नहीं पाया,
    हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया|
   अधूरा अनसुना ही रह गया यूं प्यार का किस्सा,
   कभी तुम सुन नहीं पाई कभी मैं कह नहीं पाया |



      गिरेबां चाक कर अपना कि सीना और मुश्किल है,
      हर पल मुस्कुराके अश्क पीना और मुश्किल है |
     हमारी बदनसीबी ने हमें इतना सिखाया है,
    किसी के इश्क में मरने से जीना और मुश्किल है|



    
मिले हर जख्म को मुस्कान से सीना नहीं आया,
    अमरता चाहते थे पर जहर पीना नहीं आया |
   तुम्हारी और हमारी दास्तां में फर्क इतना है,
   मुझे मरना नहीं आया तुम्हें जीना नहीं आया|



  
मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हें बतला रहा हूं मैं ,
कोई लब छू गया था तब के अब तक गा रहा हूं मैं|
बिछड़ के तुमसे अब कैसे जिया जाए बिना तड़पे,
जो मैं खुद ही नहीं समझा वही समझा रहा हूं मैं|



    सब अपने दिल के राजा हैं सबकी  कोई रानी है,
    भले प्रकाशित हो ना हो पर सब की कोई कहानी है|
   बहुत सरल है किसने कितना दर्द सहा है,
   जितनी जिसकी आंख  हंसे है उतनी पीर  पुरानी है|



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    पुकारे आँख में चढ़कर तो खू को खू समझता है,
    अँधेरा किसको को कहते हैं ये बस जुगनू समझता है,
    हमें तो चाँद तारों में भी तेरा रूप दिखता है,
    मोहब्बत में नुमाईश को अदायें तू समझता है



    जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल एक ऐसा इकतारा है,
    जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.
    झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर,
    तब कहती हो 'प्यार' हुआ है, क्या एहसान तुम्हारा है



    कितनी दुनिया है मुझे जिंदगी देने वाली,
   और एक ख्वाब है तेरा कि जो मर जाता है
   खुद को तरतीब से जोडूं तो कहा से जोडूं,
   मेरी मिट्टी में जो तू है कि बिखर जाता है



   
नेह के सन्दर्भ बौने हो गए होंगे मगर,
   फिर भी तुम्हारे साथ मेरी भावनायें हैं,
   शक्ति के संकल्प बोझिल हो गये होंगे मगर,
   फिर भी तुम्हारे चरण मेरी कामनायें हैं,



    
 हर एक नदिया के होंठों पे समंदर का तराना है,
     यहाँ फरहाद के आगे सदा कोई बहाना है !
    वही बातें पुरानी थीं, वही किस्सा पुराना है,
      तुम्हारे और मेरे बीच में फिर से जमाना है



    
 मुझे मारकर वह खुश है कि सारा राज उस पर है
     यकीनन कल है मेरा आज बेशक उसका आज है
    उसे जिद थी कि झुकाओ सर तभी दस्तार बख्शूंगा
    मैं अपना सर बचा लाया महल और ताज उस पर है




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    इस उड़ान पर अब शर्मिंदा, में भी हूँ और तू भी है
    आसमान से गिरा परिंदा, में भी हूँ और तू भी है
    छुट गयी रस्ते में, जीने मरने की सारी कसमें
    अपने-अपने हाल में जिंदा, में भी हूँ और तू भी है



    पुरानी दोस्ती को इस नई ताकत से मत तौलो
    ये संबंधों की तुरपाई है षड्यंत्रों से मत खोलो
    मेरे लहजे की छेनी से गढ़े कुछ देवता जो कल
    मेरे लफ्जे में मरते थे वो कहते है कि अब मत बोलो



    अगर दिल ही मुअज्जन हो सदायें काम आती हैं,
    समन्दर में सभी माफिक हवायें काम आती हैं
    मुझे आराम है ये दोस्तों की मेहरवानी है,
    दुआयें साथ हों तो सब दवायें काम आतीं है।



    खुशहाली में एक बदहाली, में भी हूँ और तू भी है
    हर निगाह पर एक सवाली, में भी हूँ और तू भी है
    दुनिया कितना अर्थ लगाए, हम दोनों को मालूम है
    भरे-भरे पर खाली-खाली, में भी हूँ और तू भी है



     मैं अपने गीतों और गजलों से उसे पैगाम करता हूं
     उसकी की दी हुई दौलत उसी के नाम करता हूं
     हवा का काम है चलना दिए का काम है जलना
     वो अपना काम करती है मैं अपना काम करता हूं



    एक दो दिन में वो इकरार कहाँ आएगा
    हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा
   आज बंधा है जो इन् बातों में तो बहल जायेंगे
    रोज इन बाहों का त्यौहार कहाँ आएगा



kahi par jag liye tum bin
कुमार विश्वास की कविताएं

     कहीं पर जग लिए तुम बिन, कहीं पर सो लिए तुम बिन
     भरी महफिल में भी अक्सर, अकेले हो लिए तुम बिन
     ये पिछले चंद वर्षों की कमाई साथ है अपने
    कभी तो हंस लिए तुम बिन, कभी तो रो लिए तुम बिन



     किसी पत्थर में मूरत है कोई पत्थर की मूरत है
    लो हमने देख ली दुनिया जो इतनी ख़ूबसूरत है
     ज़माना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर ये है
    तुम्हें मेरी जरूरत है मुझे तेरी जरूरत है



     कोई खामोश है इतना, बहाने भूल आया हूँ
     किसी की इक तरन्नुम में, तराने भूल आया हूँ
     मेरी अब राह मत तकना कभी ऐ आसमाँ वालो
     मैं इक चिड़िया की आँखों में, उड़ाने भूल आया हूँ



     हर एक नदिया के होठों पर समुंदर का तराना है
    यहां फरहाद के आगे खड़ा फिर कोई बहाना है
    वही बातें पुरानी थी वही किस्सा पुराना है
     तुम्हारे और मेरे बीच में फिर से जमाना है




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koi diwan kahta hai
कुमार विश्वास की कविता हिंदी में

     किसी के दिल की मायूसी जहाँ से होके गुजरी है,
     हमारी सारी चालाकी वहीं पे खो के गुजरी है
     तुम्हारी और हमारी रात में बस फर्क इतना है,
     'तुम्हारी' सो के गुजरी है 'हमारी' रो के गुजरी है



      कोई कब तक महेज सोचे,कोई कब तक महेज गाए
     ईलाही क्या ये मुमकिन है कि कुछ ऐसा भी हो जाए
     मेरा 'महताब' उसकी रात के आगोश मे पिघले
    मैँ उसकी नीँद मेँ जागूँ वो मुझमे घुल के सो जाए



     
खुद से भी न मिल सको इतने पास मत होना
     इश्क़ तो करना मगर देवदास मत होना
     देना , चाहना , मांगना या खो देना
    ये सारे खेल है इनमें उदास मत होना




    
स्वयं से दूर हो तुम भी स्वयं से दूर हैं हम भी
    बहुत मशहूर हो तुम भी बहुत मशहूर हैं हम भी
    बड़े मगरूर हो तुम भी बहुत मगरूर हैं हम भी
    अत: मजबूर हो तुम भी बहुत मजबूर हैं हम भी



kumar vishwas poem lyrics
कुमार विश्वास की कविता

     तुम्हीं पे मरता है ये दिल अदावत क्यों नहीं करता,
     कई जन्मों से बंदी है वगावत क्यों नहीं करता
     कभी तुमसे थी जो वो ही शिकायत है जमाने से,
     मेरी तारीफ करता है मुहब्बत क्यों नही करता



     जो धरती से अम्बर जोड़े, उसका नाम 'मोहब्बत' है,
     जो शीशे से पत्थर तोड़े, उसका नाम 'मोहब्बत' है,
     कतरा-कतरा सागर तक तो,जाती है हर उम्र मगर,
     बहता दरीया वापस मोड़े, उसका नाम 'मोहब्बत' है



     तुम्हारे पास हूं लेकिन, जो दूरी है समझता हूं
     तुम्हारे बिन मेरी हस्ती, अधूरी है समझता हूं,
    तुम्हे मैं भूल जाऊँगा, ये मुमकिन है नहीं लेकिन
    तुम्ही को भूलना सबसे जरूरी है समझता हूं



    
 नज़र में शोखियां लब पर मोहब्बत का तराना है
     मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है,
    कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझको
     सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है।



     बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन
     मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तन चंदन
    इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है
    एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन



     हमें बेहोश कर साकी, पिला भी कुछ नहीं हमको
    कर्म भी कुछ नहीं हमको, सिला भी कुछ नहीं हमको
    मोहब्बत ने दे दिआ है सब, मोहब्बत ने ले लिया है सब
     मिला कुछ भी नहीं हमको, गिला भी कुछ नहीं हमको



कुमार विश्वास शायरी

     पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार करना क्या
    जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार करना क्या
     मोंहब्बत का मज़ा तो डूबने की कश्म-कश में है
     हो गर मालूम गहराई तो दरिया पार करना क्या



      फ़लक पे भोर की दुल्हन यूँ सज के आई है,
      ये दिन उगा है या सूरज के घर सगाई है,
    अभी भी आते हैं आँसू मेरी कहानी में,
    कलम में शुक्र-ए-खुदा है कि ‘रौशनाई’ है



      भ्रमर कोई 'कुमुदनी' पर मचल बैठा तो हंगामा,
    हमारे दिल में कोई 'ख्वाब' पल बैठा तो हंगामा,
    अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
    मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा



     बात ऊँची थी मगर बात जरा कम आंकी
     उसने जज्बात की औकात जरा कम आंकी
     वो फरिश्ता कह कर मुझे जलील करता रहा
     मै इंसान हूँ, मेरी जात जरा कम आंकी



    
 मिल गया था जो मुक़द्दर वो खो के निकला हूँ.
     में एक लम्हा हु हर बार रो के निकला हूँ.
    राह-ए-दुनिया में मुझे कोई भी दुश्वारी नहीं.
    में तेरी ज़ुल्फ़ के पेंचो से हो के निकला हूँ
.


      महफिल-महफ़िल मुस्काना तो पड़ता है,
     खुद ही खुद को समझाना तो पड़ता है
     उनकी आँखों से होकर दिल जाना.
    रस्ते में ये मैखाना तो पड़ता है.




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    मोंहब्बत एक 'अहसासों' की, पावन सी कहानी है
    कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है,
    यहाँ सब लोग कहते है, मेरी आँखों में पानी है
   जो तुम समझो तो मोती है, जो ना समझो तो पानी है



     मैं उसका हूँ वो इस अहसास से इंकार करता है
    भरी महेफ़िल में भी, रुसवा मुझे हर बार करता है,
    यकीं है सारी दुनिया को, खफा है मुझसे वो लेकिन
    मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है



    
मैं तेरा ख्वाब जी लूँ पर लाचारी है,
   मेरा गुरूर मेरी ख्वाहिसों पे भारी है,
   सुबह के सुर्ख उजालों से तेरी मांग से,
   मेरे सामने तो ये श्याह रात सारी है



      ये दिल बर्बाद करके, इसमें क्यों आबाद रहते हो
     कोई कल कह रहा था तुम "इलाहाबाद" रहते हो.
    ये कैसी शोहरतें मुझे अता कर दी मेरे मौला
    में सब कुछ भूल जाता हु मगर तुम याद रहते हो



    
 ये चादर सुख की मोल क्यूँ, सदा छोटी बनाता है
    सिरा कोई भी थामो, दूसरा खुद छुट जाता है,
    तुम्हारे साथ था तो मैं, जमाने भर में रुसवा था
    मगर अब तुम नहीं हो तो, ज़माना साथ गाता है



     वो जो खुद में से कम निकलतें हैं
     उनके ज़हनों में बम निकलतें हैं
     आप में कौन-कौन रहता है ?
    हम में तो सिर्फ हम निकलते हैं



   
 ये वो ही इरादें हैं, ये वो ही तबस्सुम है
    हर एक मोहल्लत में, बस दर्द का आलम है
    इतनी उदास बातें, इतना उदास लहजा,
    लगता है की तुम को भी, हम सा ही कोई गम है



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कुमार विश्वास शायरी हिंदी
     हर इक खोने में हर इक पाने में तेरी याद आती है
     नमक आँखों में घुल जाने में तेरी याद आती है
     तेरी अमृत भरी लहरों को क्या मालूम गंगा माँ
     समुंदर पार वीराने में तेरी याद आती है

              


     हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते
     मगर रस्मे-वफ़ा ये है कि ये भी कह नहीं सकते
     जरा कुछ देर तुम उन साहिलों कि चीख सुन भर लो
    जो लहरों में तो डूबे हैं, मगर संग बह नहीं सकते



     समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
    ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
    मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
     जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता



     वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है
    वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है
    किसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले से
    यहाँ ख़त भी थोड़ी देर में अखबार होता है


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