बचपन पर शायरी, जिन्हें पढ़कर आपको अपना बचपन याद आ जाएगा | bachpan shayari, status | bachpan quotes in hindi

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बचपन पर बेहतरीन शायरी

bachpan shayari in hindi नमस्कार दोस्तों- बचपन हमारे जीवन का सबसे खूबसूरत, अल्हड़, और मासूम हिस्सा होता है| और अक्सर बचपन  को याद करके हमारी आंखें नम हो जाती हैं|

वह धूल मिट्टी में खेलना, शरारतें, करना मां का डांटने के बाद, फिर प्यार से मनाना भला किसे याद नहीं आता| जब हम बच्चे थे तो बड़े होने की जल्दी थी, और आज जब हम बड़े हो गए हैं,

तो सोचते हैं फिर से वही बचपन के दिन आ जाए| पर दोस्तों- हकीकत तो यह है कि जो समय एक बार चला जाता है को दोबारा लौटकर वापस नहीं आता, वह समय बस हमारी यादों में ही रह जाता है|

तो पेश- है बचपन को याद करती हुई कुछ बेहतरीन शायरी और जिनको पढ़ते हुए आपको अपने बचपन के दिन याद आ जाएंगे..bachpan shayari bachpan quotes


bachpan shayari  in hindi


bachpan ki shayari
बचपन शायरी हिन्दी में



in hindi 

ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो 
भले छीन लो मुझ से मेरी जवानी 
मगर मुझ को लौटा दो बचपन का सावन 
वो काग़ज़ की कश्ती वो बारिश का पानी

in hinglish

Yah Daulat Bhi Le Lo yah Shohrat Bhi Le Lo 

 Bhale Cheen Lo Mujhse Meri Jawani,

 Magar Mujhko lauta do Bachpan Ka Sawan 

Wo Kagaz Ki Kashti wo Barish Ka Pani.





कुछ अपनी हरकतों से,
तो कुछ अपनी मासूमियत से,
उनको सताया था मैंने,
कुछ वृद्धों और कुछ वयस्कों को,
इस तरह उनके बचपन से मिलाया था मैंने ।

Kuchh apni harkato Se To Kuchh apni masumiyat se unko sataya Tha Maine, Kuchh briddho aur kuchh Vyasko ko, Is Tarah unke Bachpan se Milaya tha maine.




मैं ने बचपन में अधूरा ख़्वाब देखा था कोई,
आज तक मसरूफ़ हूँ उस ख़्वाब की तकमील में ।

maine Bachpan Mein Adhura Khwab Dekha Tha Koi, Aaj Tak mashroof use Khwab ki takmeel mein.





बचपन भी कमाल का था
खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें
या ज़मीन पर
आँख बिस्तर पर ही खुलती थी

 Bachpan bhi kamal ka tha 

khelte khelte Chahe Chhat per Soye 

ya Jameen per Aankh Bistar pe hi khulti thi.





बचपन के दिन भी कितने अच्छे होते थे
तब दिल नहीं सिर्फ खिलौने टूटा करते थे
अब तो एक आंसू भी बर्दाश्त नहीं होता
और बचपन में जी भरकर रोया करते थे

 Bachpan Ke Din Bhi kitne acche Hote the

 tab Dil Nahin sirf Khilaune Tuta Karte The,

 Ab To Ek Aansu bhi bardasht nahin Hota

 aur Bachpan Mein Ji Bhar Kar Roya Karte The.





वो क्‍या दिन थे
मम्‍मी की गोद और पापा के कंधे,
न पैसे की सोच और न लाइफ के फंडे
न कल की चिंता और न फ्यूचर के सपने,
अब कल की फिकर और अधूरे सपने
मुड़ कर देखा तो बहुत दूर हैं अपने,
मंजिलों को ढूंडते हम कहॉं खो गए
न जाने क्‍यूँ हम इतने बड़े हो गए |

 vo Kya Din the

 Mummy ki god aur papa ke kandhe,

 na Paise Ki Soch aur na life ke funday

 na Kal Ki Chinta aur na future Ke Sapne,

 ab kal ki Fikar aur adhure Sapne

 mudkar Dekha To bahut Dur Hain Apne,

 manjilon Ko dhundhte Ham Kahan Kho Gaye

 Ye Na Jaane Kyon Ham itne bade ho gaye.



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रोने की वजह भी न थी
न हंसने का बहाना था
क्यो हो गए हम इतने बडे
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था |

 Rone Ki vajah bhi Na Thi

 na Hasne ka bahana tha,

 Kyon Ho Gaye Ham itne Bade

 isase Achcha To Bachpan Ka Jamana tha.





बचपन में जहाँ चाहा हँस लेते थे
जहाँ चाहा रो लेते थे और अब
मुस्कान को तमीज चाहिए
और आंसुओं को तन्हाई |

Bachpan Mein Jahan Chaha Hans lete the

Jahan Chaha Ro lete the, 

aur ab AB muskan ko tamiz chahie 

aur Aansuon ko Tanhai.





जिस के लिए बच्चा रोया था और पोंछे थे आँसू बाबा ने
वो बच्चा अब भी ज़िंदा है वो महँगा खिलौना टूट गया 
                  - महशर बदायुनी

 Jiske Liye baccha Roya Tha aur Poche the Aansu Baba Ne,

 vo baccha ab bhi Jinda Hai, vo mahanga Khilauna Tut Gaya.





ना कुछ पाने की आशा ना कुछ खोने का डर
बस अपनी ही धुन, बस अपने सपनो का घर
काश मिल जाए फिर मुझे वो बचपन का पहर।

na kuch pane ki Asha na kuch khone Ka Dar bus apni hi Dhun bus Apne Sapnon ka ghar, Kash mil jaaye Fir Mujhe vah Bachpan Ka pahar.





एक इच्छा है भगवन मुझे सच्चा बना दो,
लौटा दो मेरा बचपन मुझे बच्चा बना दो ।

ek ichcha hi Bhagwan Mujhe Saccha banaa do, lauta do Mera Bachpan Mujhe baccha banaa do.





दौड़ने दो खुले मैदानों में,
इन नन्हें कदमों को जनाब
जिंदगी बहुत तेज भगाती है,
बचपन गुजर जाने के बाद
बचपन की वो यादें अब भी आती हैं
रोते में अब भी वो हँसा जाती हैं|

 daudne do Khule Maidano Mein 

in Nanhe kadmon ko Janab.

 Jindagi bahut Tej Bhagti Hai 

Bachpan Gujar jaane ke bad,

 bachpan ki yaden ab bhi Aati Hain 

Rote mein ab bhi vo hasa Jaati Hai.





बचपन में हम ही थे या था और कोई
वहशत सी होने लगती है यादों से 
       - अब्दुल अहद साज़

 Bachpan Mein ham hi the ya tha Aur Koi, 

 vahsat See Hone Lagi Hai Yaadon Se...



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कितने खुबसूरत हुआ करते थे
बचपन के वो दिन,
सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से
दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी |

 kitne Khubsurat Hua Karte The 

bachpan ke Wo Din,

 Sirf Do ungaliyan judnae se 

dosti fir se shuru ho Jaya karti thi.





इक खिलौना जोगी से खो गया था बचपन में 
ढूँढता फिरा उस को वो नगर नगर तन्हा 
              - जावेद अख़्तर

 Ek Khilauna Jogi se kho gaya tha Bachpan mein,

 dudta Fira usko vo Nagar Nagar Tanha...




एक हाथी एक राजा एक रानी के बग़ैर 
नींद बच्चों को नहीं आती कहानी के बग़ैर 
              - मक़सूद बस्तवी

 Ek Hathi, Ek Raja, Ek Rani ke bagair
 Nind bacchon ko nahin aati Kahani ke bagair.





असीर-ए-पंजा-ए-अहद-ए-शबाब कर के मुझे 
कहाँ गया मिरा बचपन ख़राब कर के मुझे 
                - मुज़्तर ख़ैराबादी

 Asir ye panja ye ahad ye sabab karke mujhe,

 kahan gaya Mera Bachpan kharab karke mujhe.





बचपन में आकाश को छूता सा लगता था,
इस पीपल की शाख़ें अब कितनी नीची हैं ।

Bachpan Mein Aakash ko Chhuta Sa lagta tha, is Pipal ki Saakhen ab Kitni Nichi Hai.





आशियाने जलाये जाते हैं जब तन्हाई की आग से,  
तो बचपन के घरौंदो की वो मिट्टी याद आती है  
याद होती जाती है जवां बारिश के मौसम में तो, 
बचपन की वो कागज की नाव याद आती है ।

aashiyane jalaye Jaate Hain Jab Tanhai Ki Aag se Tu bachpan ke gharodon Ki vo Mitti Yad Aati Hai, Yad Ho Jaati Hai jawan Barish Ke Mausam Mein To bachpan ki vah kagaj ki Naav Yad Aati Hai.





फ़क़त माल-ओ-ज़र-ए-दीवार-ओ-दर अच्छा नहीं लगता 
जहाँ बच्चे नहीं होते वो घर अच्छा नहीं लगता 
               - अब्बास ताबिश

 Fakat maal o jar Deewar o dar Achcha Nahin Lagta,

 Jahan bacche Nahin Hote vo Ghar Achcha Nahin Lagta.



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चार दोस्त ,

दो साइकिल ,

खाली जेब, 

और पूरा शहर...

जनाब, हमारा एक खूबसूरत दौर 

ये भी था ज़िंदगी का,

उस दौर में हम सोचा करते थे की 

कुछ बेहतर  हासिल करेंगे ,

हमें क्या पता था की 

उससे बेहतर कुछ था ही नहीं.

Char Dost

Do Cycle,

Khali Jeb

Aur Pura Shahar...

Janab, Hamara ek Khubsurat daur

ye bhi tha Zindgi ka,

Us daur me hum socha karte the ki

kuchh behtar hasil karenge,

hame kya pata tha ki

usse behtar kuchh tha hi nahi.





दूर मुझसे हो गया बचपन मगर
मुझमें बच्चे सा मचलता कौन है
      -  राजेन्द्र कलकल

 dur Mujhse Ho Gaya Bachpan Magar,

mujh mein bacche Sa machalta kaun hai.





मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था 
मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी 
        - जावेद अख़्तर

 main Bachpan Mein Khilonae Todta tha 

     Mere Anjam ki vo ibtida thi...





इतनी चाहत तो लाखो रुपए पाने की भी नहीं होती,
जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है ।

itni Chahat to Lakhon rupaye pane ki hi Nahin Hoti, jitni bachpan ki tasvir Dekhkar Bachpan Mein Jaane Ki hoti hai.





ईमान बेचकर बेईमानी खरीद ली
बचपन बेचकर जवानी खरीद ली,
न वक़्त, न खुशी, न सुकून
सोचता हूँ ये कैसी जिन्दगानी खरीद ली ।

Imaan bech Kar Beimaani khareed Li Bachpan bechkar javani khareed Li, Na Waqt, na Khushi, na Sukoon sochta hun yah Kaisi jindgani khareed Li.





उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में 
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते 
               - बशीर बद्र

 udane do parindon ko abhi Sokh Hawa Mein,

 Fir Laut Ke bachpan ke Jamane Nahin Aate.





मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है 
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है 
    - जोश मलीहाबादी

 Mere Rone ka jismein kissa hai,

 Umra ka behtarin hissa hai...



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मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई 
        - कैफ़ी आज़मी

 mera Bachpan bhi Sath Le Aaya,

 Gaon Se Jab Bhi aa Gaya Koi.





दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में सो 
ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम

duaaen Yad Kara De Gai Thi Bachpan Mein so, Zakhm khate Rahe Aur Dua Diye Gaye ham...





अब तक हमारी उम्र का बचपन नहीं गया 
घर से चले थे जेब के पैसे गिरा दिए 
          - नश्तर ख़ानक़ाही

 aap tak Hamari Umra ka Bachpan Nahin Gaya, 

Ghar se chale the Jeb ke paise Gira Diye.





 अजीब सौदागर है ये वक़्त भी
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया

 Ajeeb Saudagar hai ye Waqt Bhi, 

javani ka lalach dekar Bachpan Le Gaya.





बड़ी हसरत से इंसाँ बचपने को याद करता है 
ये फल पक कर दोबारा चाहता है ख़ाम हो जाए 
                      - नुशूर वाहिदी

 Badi Hasrat se Insan Bachpane Ko Yad karta hai, 

yah fal pak kar Dobara Chahta Hai kham ho jaaye.






बचपन की दोस्ती थी बचपन का प्यार था
तू भूल गया तो क्या तू मेरे बचपन का यार था

 bachpan ki dosti Thi Bachpan Ka Pyar Tha, 

tu bhul gaya to kya Tu mere Bachpan Ka Yaar tha.






कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से,
कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलते हैं ।

kai Sitaron Ko Main Jaanta hun Bachpan se, 

Kahin Bhi Jao Mere Sath Sath Chalte Hain.





मुमकिन है हमें गाँव भी पहचान न पाए,
बचपन में ही हम घर से कमाने निकल आए ।

 Mumkin Hai Hamen Gaon Bhi pahchan Na Paye,

 Bachpan Mein Hi Ham Ghar Se kamane Nikal Aaye.






कुछ नहीं चाहिए तुझ से ऐ मेरी उम्र-ए-रवाँ
मेरा बचपन, मेरे जुगनू, मेरी गुड़िया ला दे ।

 Kuchh Nahin chahie Tumse ae Meri Umra ye Rawan,

 Mera Bachpan, Mere Jugnu, Meri Gudiya la de.




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होठों पे मुस्कान थी कंधो पे बस्ता था
सुकून के मामले में वो जमाना सस्ता था

 Hothon Pe Muskan Thi kandhon pe Basta tha, 

sukun ke mamle mein wo Jamana Sasta Tha.






बचपन के खिलौने सा कहीं छुपा लूँ तुम्हें,
आँसू बहाऊँ, पाँव पटकूँ और पा लूँ तुम्हें।

bachpan ke Khilaune Sa Kahin Chhupa Lo Tumhen, 

Aansu bahanon, Paon Patkou aur Paa lu Tumhen.







चलो, फिर से बचपन में जाते हैं
खुदसे बड़े-बड़े सपने सजाते हैं
सबको अपनी धुन पर फिर से नचाते हैं
साथ हंसते हैं, थोड़ा खिलखिलाते हैं
जो खो गयी है बेफिक्री, उसे ढूंढ लाते हैं
चलो, फिर से बचपन में जाते हैं ।

chalo fir se Bachpan Mein Jaate Hain khud se bade bade Sapne sajate Hain, Sab ko apni Dhun per fir se Nachahte Hain Sath Haste Hain Thoda Khilkhilate hain, Jo Kho gai hai befikri use dhundh late Hain chalo fir se Bachpan Mein jate hai....





देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना,
जब तजुर्बे आए थे संजीदा बनाने के लिए ।

der tak hansta Raha Un per Hamara Bachpana, Jab tajurbe Aaye The Sanjida banane ke liye.






बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी,
अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

 Bachpan Mein To Shamen Bhi Hua karti thi, 

Ab To bus Subah ke bad Raat Ho Jaati Hai.






कौन कहे मा'सूम हमारा बचपन था 
खेल में भी तो आधा आधा आँगन था 
         - शारिक़ कैफ़ी

Kaun Kahe Masoom Hamara Bachpan tha,

 Khel Mein Bhi to Aadha Aadha Angan tha.



गांव की बचपन की यादें

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झूठ बोलते थे फिर भी कितने सच्चे थे हम
ये उन दिनों की बात है जब बच्चे थे हम.

 Jhooth bolate the Fir Bhi kitne sacche the ham, 

yah Un Dinon Ki Baat Hai Jab bacche the hum.






वो बचपन भी क्या दिन थे मेरे
न फ़िक्र कोई न दर्द कोई
बस खेलो, खाओ, सो जाओ
बस इसके सिवा कुछ याद नही.|

Vo Bachpan Bhi Kya Din the mere

 na Fikar Koi Na Dard Koi,

 bus Khelo Khao aur so jao

 bus Iske Siva Kuchh Yad Nahin.






बचपन की बात ही कुछ और थी मेरे दोस्त,
जब घाव दिल पर नही हाथ-पैरों पर हुआ करते थे,
जब आँसू छुपाने के लिए तकिया नही माँ का आँचल जरूरी होता था,
जब रोने के लिए नींद नही नींद के लिए रोया करते थे,
जब ख़ुशी प्यार के चंद पलों में नही अच्छे गुण मिलने पर होती थी,
जब डर दिल के टुकड़े होने का नही पेन्सिल की नोख टूटने का होता था,
जब घबराहट नए चेहरों की नही नए शिक्षकों की होती थी,
जब संभलने के लिए एकांत वक़्त नही माँ की बाते होती थी,
बचपन तो बीत गया पर बचपना कभी बीतना नही चाहिए ।

bachpan ki baat hi Kuchh aur ki mere dost Jab ghav Dil per Nahin Hath Pairon per hua Karte The, Jab Aansu chhupane ke liye Takiya Nahin Maa Ka Aanchal Jaruri Hota tha, Jab Rone ke liye Nind Nahin Nind ke liye Roya Karte The, Jab Khushi Pyar Ke Chand Palon Mein Nahin acche gun milane per hoti thi Jab Dard Dil Ke Tukde hone ka Nahin pencil ki NOK tutane Ka Hota tha, jab ghabrahat naye chehron Ki Nahin nai shikshakon ki hoti thi, Jab sambhalne Ke Liye Ekant Waqt Nahin Maa Ki baten hoti thi, Bachpan to Beet Gaya per Bachpana kabhi Bitna Nahin chahie.





आसमान में उड़ती एक पतंग दिखाई दी,
आज फिर से मुझ को मेरी बचपन दिखाई दी ।

Aasman Mein udati ek Patang Dikhai Dee, Aaj Fir Se Mujhko Meri Bachpan Dikhai Dee.






बचपन की कहानी याद नहीं
 बातें वो पुरानी याद नहीं
माँ के आँचल का इल्म तो है
पर वो नींद रूहानी याद नहीं |

 bachpan ki kahani Yad Nahin 

baten purani Yad Nahin,

 Maa Ke Aanchal ka ilm To Hai 

Par wo nind Ruhani Yad Nahin.






जिंदगी फिर कभी न मुस्कुराई बचपन की तरह
मैंने मिट्टी भी जमा की खिलौने भी लेकर देखे.

 Jindagi Fir Kabhi Na MuskuraI bachpan ki tarah, 

maine Mitti bhi Jama ki Khilonae bhi Lekar Dekhe.





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बीते हुए बचपन की शायरी

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जो सपने हमने बोए थे नीम की ठंडी छाँवों में,
कुछ पनघट पर छूट गए,कुछ काग़ज़ की नावों में

 Jo Sapne Humne boye the Neem ki Thandi chhavon me,

 Kuchh Panghat per chhut Gaye Kuchh kagaj ki Naav Mein.






एक बचपन का जमाना था,
 जिस में खुशियों का खजाना था
चाहत चाँद को पाने की थी,
पर दिल तितली का दिवाना था
खबर ना थी कुछ सुबहा की,
ना शाम का ठिकाना था
     थक कर आना स्कूल से,
     पर खेलने भी जाना था
माँ की कहानी थी,
परीयों का फसाना था
बारीश में कागज की नाव थी,
हर मौसम सुहाना था
हर खेल में साथी थे,
हर रिश्ता निभाना था
गम की जुबान ना होती थी,
ना जख्मों का पैमाना था
रोने की वजह ना थी,
ना हँसने का बहाना था
क्युँ हो गऐे हम इतने बडे,
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था

Ek Bachpan Ka Jamana tha 

jismein khushiyon Ka khajana tha,

 Chahat Chand Ko pane ki thi 

Par Dil Titli Ka Deewana Tha,

 Khabar na thee kuck Subaha Ki 

Na Sham Ka Thikana tha,

 Thakkar Aana school se 

per khelne bhi Jana Tha,

 Maa ki kahani thi 

pariyon Ka Fasana tha,

 Barish Mein kagaj ki Nav Thi 

Har Mausam Suhana tha,

 Har Khel Mein Sathi the 

Har Rishta nibhaanaa tha,

 Gam Ki juban Na Hoti thi 

na jakhmon ka paimana tha,

 Rone ki vajah na thi 

na Hasne ka bahana tha,

 kyu Ho Gaye Ham Itne Bade 

isase Achcha To Bachpan Ka Jamana tha.






ज्यादा कुछ नही बदलता उम्र बढने के साथ,
बचपन की जिद समझौतों मे बदल जाती है

 Jyada Kuchh Nahin Badalta Umra badhane ke sath,

 bachpan ki Jid samjhauto Mein Badal Jaati Hai.






फिर से बचपन लौट रहा है शायद,
 जब भी नाराज होता हूँ खाना छोड़ देता हूँ ।

fir se Bachpan Laut raha hai Shayad, Jab Bhi naraj hota hun khana Chhod deta hun.





बचपन में लगी चोट पर मां की हल्‍की-हल्‍की फूँक,
और कहना कि बस अभी ठीक हो जाएगा
वाकई अब तक कोई मरहम वैसा नहीं बना ।

Bachpan Mein Lagi chot per maa ki Halki Si Phoonk aur Kahana ki bus abhi theek ho jaega, vakai ab tak Koi Marham Vaisa Nahin Bana.






किसने कहा नहीं आती वो बचपन वाली बारिश
तुम भूल गए हो शायद अब नाव बनानी कागज़ की

 Kisne Kaha nahin aati vo Bachpan wali Barish,

 Tum bhul gaye ho Shayad ab Nav Banani kagaj ki.





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सुकून की बात मत कर ऐ दोस्त,
बचपन वाला इतवार अब नहीं आता

 sukun ki baat mat kar ay dost,

 Bachpan wala itwar ab Nahin Aata.






आजकल आम भी पेड़ से खुद गिरके टूट जाया करते हैं
छुप-छुप के इन्हें तोड़ने वाला अब बचपन नहीं रहा

 aajkal Aam bhi ped Se Khud Gir ke Tut Jaya Karte Hain,

 Chup Chup Ke itne todne wala ab Bachpan Nahin Raha...







वक्त से पहले ही वो हमसे रूठ गयी है
बचपन की मासूमियत न जाने कहाँ छूट गयी है

 Waqt se pahle Hi Vo Humse Rooth Gayi Hai,

 bachpan ki masumiyat Na Jaane Kahan chhut gai hai.





कौन कहता है कि बचपन वापस नही आता
दो घड़ी अपनी माँ के पास बैठ कर तो देखो,
खुद को बच्चा महसूस ना करो'' तो फिर कहना ।

Kaun Kahta Hai Ki Bachpan Wapas Nahin Aata Do Ghadi apni Maa ke pass baith kar to Dekho, Khud Ko baccha Mahsoosh Na Karo to Fir Kahana.






चलो के आज बचपन का कोई खेल खेलें,
 बडी मुद्दत हुई बेवजह हँसकर नही देखा

 Chalo ke Aaj Bachpan Ka Koi Khel Khelen,

 Badi Muddat Hui bewajah hanskar Nahin Dekha.







अब तो खुशियाँ हैं इतनी बड़ी
चाँद पर जाकर भी ख़ुशी नहीं,
एक मुराद हुई पूरी कि दूसरी आ गयी
कैसे हो खुश हम, कोई बता दो,
अब तो बस दुःख भी हैं इतने बड़े,
कि हर बात पर दिल टुटा करता है


Ab To Khushiyan Hai Itni Badi 
Chand par ja kar bhi Khushi Nahin
 Ek Murad Hui Puri ki dusri a gai
 kaise ho Khush Ham Koi bata do
 Ab To bus Dukh bhi hai itne Bade
 ki Har Baat Per Dil Tuta karta hai...




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काश मैं लौट जाऊं बचपन की उन हसीं वादियों में
ऐ जिंदगी जब न तो कोई जरूरत थी और न ही कोई जरूरी था

 Kaash main Laut jaaun bachpan ki Un Hasin waadiyon mein,

 aye Jindagi Jab Na to Koi jarurat Thi Aur na hi koi jaruri tha.






किताबों से निकल कर तितलियाँ ग़ज़लें सुनाती हैं
टिफ़िन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है 
               - सिराज फ़ैसल ख़ान

 kitabon se nikalkar titliyan gazalen Sunati Hai,

 tiffin rakhti Hai Meri Maa To Basta muskurata hai.






 मै उसको छोड़ न पाया बुरी लतों की तरह,
वो मेरे साथ है बचपन की आदतों की तरह

 Main Usko chhod na Paya Buri Laton Ki Tarah,

 vo Mere Sath Hai bachpan ki Aadaton Ki Tarah.







सुना है अब बड़े हो गए है हम
अब जो अपने पैरो पे खड़े हो गये है हम।
इक वो शाम होती थी,जो दोस्तों के नाम होती थी,
इक शाम आज होती है,सिर पर दिन भर की थकान होती है।
अब समझ है हमें अपनी जिम्मेदारियों की,
भला किसे जरुरत है अब यार और उनकी यारियों की।
वो दादी की कहानियां कितनी सच्ची लगती थीं
झूठी थी पर फिर भी अच्छी लगती थी।
ये वो दौर था जब बच्चे थे हम,
कितना झूठ बोलते थे पर दिल के सच्चे थे हम।
बचपन से हर शख्स याद करना सिखाता रहा,
भूलते कैसे है, बताया नही किसी ने
वक़्त भी बदला है ,थोड़ा बदले है हम
बचपन तो चला गया, पर दिल से बच्चे है हम।
खबर है हमें वो वक़्त लौट के ना आएगा।
नादान ये दिल फिर भी उन यादों को दोहराएगा ।

 suna hai ab bade ho gaye hain ham 

Ab Jo Apne Pairon per khade ho gaye hain hum,

 Ek Wo Shaam hoti Thi Jo doston ke naam hoti thi

 Ek Sham Aaj hoti hai, sir per din bhar ki thakan hoti hai,

 ab samajh Hai Hamen apni jimmedariyon ki

 Bhala Kise jarurat hai ab yaar ki aur Unki yaariyon ki,

 vo Dadi ki kahaniyan Kitni Sacchi lagti thi

 jhuthi thi per Fir Bhi acchi lagti thi,

 Bachpan Se Har shaks Yad karna Sikhata Raha,

 bhulate kaise hain bataya Nahin Kisi Ne

  Waqt Bhi Badla Hai Thoda Badle Hain Ham,

 Bachpan tu chala gaya par Dil Se bacche Hain Ham, 

Khabar Hai Hamen vo Waqt Laut Ke Na aaega,

 Nadan Ye Dil Fir Bhi Un Yadon ko Duhrayega...






हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से
देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में

 Ham bhi muskurate the Kabhi Beparwah Andaaj se,

 Dekha hai aaj Khud Ko Kuchh purani tasvirom mein.



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