Wednesday, April 8, 2020

निदा फ़ाज़ली के मशहूर शेर और दोहे | nida fazli shayari, Quotes, Status, Poetry

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नमस्कार दोस्तों - मैं अजय पाण्डेय technofriendajay.in पर आप सभी का स्वागत करता हूं और आज का यह आर्टिकल हिंदी और उर्दू के महान शायर nida fazli shayari in hindi पर आधारित है

 निदा फ़ाज़ली जी का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को ग्वालियर में हुआ था, उनका असली नाम मुक्तदा हुसैन है निदा फ़ाज़ली इनका का लेखन का नाम है, निदा फ़ाज़ली जी ने कई हिंदी फिल्मों गीत लिखे हैं, फिल्म रजिया सुल्तान, में उन्होंने अपना पहला गीत, तेरा हिज्र मेरा नसीब है लिखा था 

1998 मैं इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया सफर में धूप, आंखों भर आकाश, लफ्जों के फूल, आंख और ख्वाब के दरमियां, आदि इनकी की प्रमुख कृतियां हैं, 8 फरवरी 2016 को यह कलम का जादूगर हमेशा के लिए सो गया 

तो आइए पढ़ते हैं  nida fazli poetry  इन हिंदी....


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nida fazli shayari in hindi


Quotes in Hindi 

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता,

कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता।

Quotes in Hinglis

kabhi kisi ko mukammal jahaan nahin milata, 

kahin zameen kahin aasamaan nahin milata. 


             


हम भी किसी कमान से निकले थे तीर से,

ये और बात है कि निशाने ख़ता हुए।

ham bhi kisi kamaan se nikale the teer se, 

ye aur baat hai ki nishaane khata huye.


      


हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी,

जिस को भी देखना हो कई बार देखना।

har aadami mein hote hain das-bees aadami, 

jis ko bhi dekhana ho kai baar dekhana.


      


कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें,

छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता।

 kahaan charaag jalayen kahaan gulaab rakhen, 

chhaten to milati hain lekin makaan nahin milata.


      


ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं,

ज़बाँ मिली है मगर हम-ज़बाँ नहीं मिलता।

ye kya azaab hai sab apane aap mein gum hain, 

zabaan mili hai magar ham-zabaan nahin milata. 


      


बृन्दाबन के कृष्ण-कन्हैया अल्लाह हू,

बंसी राधा गीता गैय्या अल्लाह हू।

brindaban ke krshn-kanhaiya allaah hoo, 

bansee raadha geeta gaiyya allaah hoo. 


      


कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी चैन से जीने की सूरत न हुई,

जिस को चाहा उसे अपना न सके जो मिला उस से मोहब्बत न हुई।

kuchh tabeeyat hi mili thi aisi chain se jeene ki soorat na hui, 

jis ko chaaha use apana na sake jo mila us se mohabbat na hui. 


      


अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला,

हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला।

ab khushi hai na koi dard rulaane vaala, 

ham ne apana liya har rang zamaane vaala. 


      


दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही,

दोस्ती अपनी भी कुछ रोज़ ज़माने से रही।

din saleeqe se uga raat thikaane se rahi, 

dosti apani bhi kuchh roz zamaane se rahi.


      


मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं,

जुदा-जुदा हैं धर्म इलाक़े एक सी लेकिन ज़ंजीरें हैं।

mutthi bhar logon ke haathon mein laakhon ki taqadeeren hain, 

juda-juda hain dharm ilaaqe ek si lekin zanjeeren hain.


      

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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है,

इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है।

hosh walon ko khabar kya be-khudi kya cheez hai, 

ishq kije phir samajhiye zindagi kya cheez hai. 


      


जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया,

बच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया।

jitani buri kahi jaati hai utani buri nahin hai duniya,

 bachchon ke school mein shaayad tum se mili nahin hai duniya. 


      


इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी,

रात जंगल में कोई शमां जलाने से रही।

is andhere mein to thokar hi ujaala degi, 

raat jangal mein koi shaman jalaane se rahi.


      


मेरे बदन में खुले जंगलों की मिट्टी है,

मुझे सँभाल के रखना बिखर न जाऊँ में।

mere badan mein khule jangalon ki mitti hai, 

mujhe sanbhaal ke rakhana bikhar na jaoon mein. 


      


हर जंगल की एक कहानी वो ही भेंट वही क़ुर्बानी,

गूँगी बहरी सारी भेड़ें चरवाहों की जागीरें हैं।

har jangal ki ek kahaani vo hi bhent vahi qurbaani, 

goongi bahari saari bheden charavaahon ki jaagiren hain.


      


बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ,

याद आती है, चौका, बासन, चिमटा, फुकनी जैसी माँ।

besan ki saundhi roti par khatti chatani jaisi maa, 

yaad aati hai, chauka, baasan, chimata, phukani jaisi maa. 


      


यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता,

मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो।

yahaan kisi ko koi raasta nahin deta, 

mujhe gira ke agar tum sanbhal sako to chalo. 


      


कुछ लोग यूँही शहर में हम से भी ख़फ़ा हैं,

हर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलती।

 kuchh log yoonhi shahar mein ham se bhi khafa hain, 

har ek se apani bhi tabeeyat nahin milati. 


      


किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं,

तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो।

kisi ke vaaste raahen kahaan badalati hain, 

tum apane aap ko khud hi badal sako to chalo. 


      


बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं,

किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए।

baag mein jaane ke aadaab hua karate hain, 

kisi titali ko na phoolon se udaaya jaye. 


      


हर तरफ़ हर जगह बे-शुमार आदमी,

फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी।

har taraf har jagah be-shumaar aadami, 

phir bhi tanhaiyon ka shikaar aadami.


      

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दुनिया न जीत पाओ तो हारो न आप को,

थोड़ी बहुत तो ज़ेहन में नाराज़गी रहे।

duniya na jeet pao to haaro na aap ko, 

thodee bahut to zehan mein naaraazagi rahe.


      


अब किसी से भी शिकायत न रही,

जाने किस किस से गिला था पहले।

ab kisi se bhi shikaayat na rahi, 

jaane kis kis se gila tha pahale. 


      


पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है,

अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं।

pahale har cheez thi apani magar ab lagata hai, 

apane hi ghar mein kisi doosare ghar ke ham hain.


      


ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को,

बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख।

khuda ke haath mein mat saump saare kaamon ko, 

badalate vaqt pe kuchh apana ikhtiyaar bhi rakh. 


      


मुमकिन है सफ़र हो आसाँ अब साथ भी चल कर देखें,

कुछ तुम भी बदल कर देखो कुछ हम भी बदल कर देखें।

mumakin hai safar ho aasaan ab saath bhi chal kar dekhen,

 kuchh tum bhi badal kar dekho kuchh ham bhi badal kar dekhen. 


      


बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजी,

सलीक़ा चाहिए आवारगी में।

bahut mushkil hai banjaara-mizaaji, 

saleeqa chaahiye aawaragi mein. 


      


कहां चराग़ जलाएँ कहां गुलाब रखें,

छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता।

kahaan charaag jalayen kahaan gulaab rakhen, 

chhaten to milatee hain lekin makaan nahin milata. 


      


कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन,

फिर इस के बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर।

koshish bhi kar umeed bhi rakh raasta bhi chun, 

phir is ke baad thoda muqaddar talaash kar. 


      


हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए,

कभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए।

har ek baat ko chup-chaap kyoon suna jaye, 

kabhi to hausala kar ke nahin kaha jaye. 


      

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बदला न अपने आप को जो थे वही रहे,

मिलते रहे सभी से मगर अजनबी रहे।

badala na apane aap ko jo the vahi rahe, 

milate rahe sabhi se magar ajanabi rahe.


      

 

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें,

किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए।

ghar se masjid hai bahut door chalo yoon kar len, 

kisi rote hue bachche ko hansaaya jaye. 


      


तुम से छुट कर भी तुम्हें भूलना आसान न था,

तुम को ही याद किया तुम को भुलाने के लिए।

tum se chhut kar bhi tumhen bhoolana aasaan na tha, 

tum ko hi yaad kiya tum ko bhulaane ke liye. 


      


ये शहर है कि नुमाइश लगी हुई है कोई,

जो आदमी भी मिला बन के इश्तिहार मिला।

ye shahar hai ki numaish lagi hui hai koi, 

jo aadami bhi mila ban ke ishtihaar mila. 


      


ग़म है आवारा अकेले में भटक जाता है,

जिस जगह रहिए वहाँ मिलते-मिलाते रहिए।

gam hai aawaara akele mein bhatak jaata hai, 

jis jagah rahiye vahaan milate-milaate rahiye.


      


सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें,

क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता।

sab kuchh to hai kya dhoondati rahati hain nigaahyen, 

kya baat hai main vaqt pe ghar kyun nahin jaata.


      

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वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में,

जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता।

vo ek hi chehara to nahin saare jahaan mein, 

jo door hai vo dil se utar kyun nahin jaata. 


      


बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता,

जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता।

be-naam sa ye dard thahar kyoon nahin jaata, 

jo beet gaya hai vo guzar kyoon nahin jaata. 


      


नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढिए,

इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई।

naqsha utha ke koi naya shahar dhoondhiye, 

is shahar mein to sab se mulaaqaat ho gai. 


      


दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है,

मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है।

duniya jise kahate hain jaadu ka khilauna hai, 

mil jaye to mitti hai kho jaye to sona hai.


      


एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक,

जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा।

ek mahafil mein kai mahafilen hoti hain shareek, 

jis ko bhi paas se dekhoge akela hoga. 


      


यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें,

इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो।

yahi hai zindagi kuchh khwaab chand ummiden, 

inhi khilauno se tum bhi bahal sako to chalo.


      


दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता,

दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए।

dushmani laakh sahi khatm na keeje rishta, 

dil mile ya na mile haath milaate rahiye. 


      


हम लबों से कह न पाए उन से हाल-ए-दिल कभी,

और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है।

ham labon se kah na paye un se haal-e-dil kabhi, 

aur vo samajhe nahin ye khaamoshi kya cheez hai.


      


बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो,

चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जायेंगे।

bachchon ke chhote haathon ko chaand sitaare chhoone do,

 chaar kitaaben padh kar ye bhi ham jaise ho jaayenge.


      

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nida fazli shayari, निदा फ़ाज़ली की कविताएं

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निदा फ़ाज़ली की नज़्म


कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई,

आओ कहीं शराब पियें रात हो गई।

kuchh bhi bacha na kahane ko har baat ho gai, 

aao kahin sharaab piyen raat ho gai.


      


सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो,

सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो।

safar mein dhoop to hogi jo chal sako to chalo, 

sabhi hain bheed mein tum bhi nikal sako to chalo.


      

निदा फ़ाज़ली के चुनिन्दा दोहे , nida fazli dohe


सपना झरना नींद का जागी आँखें प्यास,

पाना, खोना, खोजना सांसों का इतिहास।

sapana jharana neend ka jagi aankhen pyaas, 

paana, khona, khojana saanson ka itihaas. 



      


माटी से माटी मिले, खो कर सभी निशान,

किस में कितना कौन है कैसे हो पहचान।

maati se maati mile, kho kar sabhi nishaan, 

kis mein kitana kaun hai kaise ho pahachaan.


      


रास्ते को भी दोष दे आँखें भी कर लाल,

चप्पल में जो कील है पहले उसे निकाल।

raaste ko bhi dosh de aankhen bhi kar laal, 

chappal mein jo keel hai pahale use nikaal.


      


मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार,

दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार।

main roya parades mein bheega maa ka pyaar, 

dukh ne dukh se baat ki bin chitthi bin taar.


      


वो सूफ़ी का क़ौल हो या पंडित का ज्ञान,

जितनी बीते आप पर उतना ही सच मान।

vo soofi ka qaul ho ya pandit ka gyaan, 

jitani beete aap par utana hi sach maan.


      


यों ही होता है सदा, हर चूनर के संग,

पंछी बनकर धूप में उड़ जाते हैं रंग।

yon hi hota hai sada, har chunar ke sang, 

panchhi banakar dhoop mein ud jaate hain rang.


      


सुना है अपने गांव में रहा न अब वह नीम,

जिसके आगे मांद थे सारे वैद्य-हकीम।

suna hai apane gaanv mein raha na ab vah neem, 

jisake aage maand the saare vaidy-hakeem. 


      


अच्छी संगत बैठ कर संगी बदले रूप,

जैसे मिल कर आम से मीठी हो गई धूप।

achchhi sangat baith kar sangi badale roop, 

jaise mil kar aam se meethi ho gai dhoop. 


      


लेके तन के नाप को, घूमे बस्ती गाँव,

हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव।

leke tan ke naap ko, ghoome basti gaanv, 

har chaadar ke gher se baahar nikale paanv.


      


नैनों में था रास्ता हृदय में था गाँव,

हुई न पूरी यात्रा छलनी हो गए पाँव।

nainon mein tha raasta hrday mein tha gaanv, 

hui na poori yaatra chhalani ho gaye paanv.


      


घर को खोजें रात दिन घर से निकले पाँव,

वो रस्ता ही खो गया जिस रस्ते था गाँव।

ghar ko khojen raat din ghar se nikale paanv, 

vo rasta hi kho gaya jis raste tha gaanv.


      


सातों दिन भगवान के क्या मंगल क्या पीर,

जिस दिन सोए देर तक भूखा रहे फकीर।

saaton din bhagavaan ke kya mangal kya peer, 

jis din soye der tak bhookha rahe phakeer.


      


उस जैसा तो दूसरा मिलना था दुश्वार,

लेकिन उस की खोज में फैल गया संसार।

us jaisa to doosara milana tha dushvaar, 

lekin us ki khoj mein phail gaya sansaar.


      


चिड़िया ने उड़ कर कहा मेरा है आकाश,

बोला शिकरा डाल से यूँही होता काश।

chidiya ne ud kar kaha mera hai aakaash, 

bola shikara daal se younhi hota kaash.


      

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छोटा कर के देखिए जीवन का विस्तार,

आंखों भर आकाश है बाहों भर संसार।

chhota kar ke dekhie jeevan ka vistaar, 

aankhon bhar aakaash hai baahon bhar sansaar.


      


चाहे गीता बांचिये या पढ़िए कुरान,

मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ज्ञान।

chaahe geeta baanchiye ya padhiye quraan, 

mera tera pyaar hi har pustak ka gyaan. 


      


बच्चा बोला देख कर मस्जिद आलीशान,

अल्लाह तेरे एक को इतना बड़ा मकान।

bachcha bola dekh kar masjid aalishaan, 

allaah tere ek ko itana bada makaan. 


      


पंछी मानव फूल जल अलग-अलग आकार,

माटी का घर एक ही सारे रिश्तेदार।

panchhi manav phool jal alag-alag aakaar, 

maati ka ghar ek hi saare rishtedaar. 


      


युग-युग से हर बाग का ये ही एक उसूल,

जिसको हंसना आ गया वो ही मट्टी फूल।

yug-yug se har baag ka ye hi ek usool, 

jisako hansana aa gaya vo hi matti phool. 


      


जादू टोना रोज का बच्चों का व्यवहार,

छोटी सी एक गेंद में भर दें सब संसार।

jaadoo tona roj ka bachchon ka vyavahaar, 

chhotee si ek gend mein bhar den sab sansaar.


      


नदिया सींचे खेत को तोता कुतरे आम,

सूरज ठेकेदार सा सब को बांटे काम।

nadiya seenche khet ko tota kutare aam, 

sooraj thekedaar sa sab ko baante kaam. 


      


बूढ़ा पीपल घाट का बतियाए दिन-रात,

जो भी गुजरे पास से सिर पे रख दे हाथ।

boodha peepal ghaat ka batiyae din-raat, 

jo bhi gujare paas se sir pe rakh de haath. 


      


जीवन के दिन रैन का कैसे लगे हिसाब,

दीमक के घर बैठ कर लेखक लिखे किताब।

jeevan ke din rain ka kaise lage hisaab, 

deemak ke ghar baith kar lekhak likhe kitaab.


      


पूजा घर में मुर्ति मीरा के संग श्याम,

जिसकी जितनी चाकरी उतने उसके दाम।

pooja ghar mein murti meera ke sang shyaam, 

jisaki jitani chaakari utane usake daam. 


      


ईसा, अल्लाह, ईश्वर सारे मंतर सीख,

जाने कब किस नाम से मिले ज्यादा भीख।

isha, allaah, ishvar saare mantar seekh, 

jaane kab kis naam se mile jyaada bheekh.


      


दर्पण में आंखें बनीं दीवारों में कान,

चूड़ी में बजने लगी अधरों की मुस्कान।

darpan mein aankhen bani deevaaron mein kaan,

 choodi mein bajane lagi adharon ki muskaan. 


      


मैं भी तू भी यात्री चलती रुकती रेल,

अपने अपने गाँव तक सब का सब से मेल।

main bhi tu bhi yaatri chalati rukati rail, 

apane apane gaanv tak sab ka sab se mel. 


      


आंगन–आंगन बेटियां, छाँटी–बांटी जायें,

जैसे बालें गेहूँ की पके तो काटी जायें।

aangan–aangan betiyaan, chanti–banti jaayen, 

jaise baalen gehoon ki pake to kaati jaayen. 


      

 

नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान,

कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान।

naqsha le kar haath mein bachcha hai hairaan, 

kaise deemak kha gai us ka hindostaan. 


      

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मुझ जैसा इक आदमी मेरा ही हमनाम,

उल्टा सीधा वो चले मुझे करे बदनाम।

mujh jaisa ik aadami mera hi hamanaam, 

ulta seedha vo chale mujhe kare badanaam.


      


सीता रावण राम का करें विभाजन लोग,

एक ही तन में देखिये तीनो का संजोग।

seeta raavan raam ka karen vibhaajan log, 

ek hi tan mein dekhiye teeno ka sanjog.


      


मैं क्या जानूँ तू बता, तू है मेरा कौन,

मेरे मन की बात को बोले तेरा मौन।

main kya jaanoon tu bata, tu hai mera kaun, 

mere man ki baat ko bole tera maun. 


      


सब की पूजा एक सी अलग-अलग हर रीत,

मस्जिद जाए मौलवी कोयल गाए गीत।

sab ki pooja ek si alag-alag hai reet, 

masjid jaye maulavi koyal gaye geet. 


                       




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