शायर जौन एलिया की कुछ बेहतरीन शायरी

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जौन एलिया शायरी


नमस्कार दोस्तों
technofriendajay.in पर आप सभी का स्वागत है दोस्तों जॉन एलिया यह नाम उर्दू के महान शायरों में से एक है इनका जन्म 14 दिसंबर 1931 में अमरोहा में हुआ था

और इनकी मृत्यु 8 नवंबर 2004 में हुई थी जॉन एलिया सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले शायरों में से एक हैं बटवारे कि 10 साल बाद वह ना चाहते हुए भी पाकिस्तान चले गए

वह पाकिस्तान में होते हुए भी अपने पैतृक स्थान को कभी भूल नहीं पाए तो दोस्तों चलिए पढ़ते हैं इस बड़े शायर के लिखे हुए कुछ बेहतरीन गज़ल और शेर john elia sher


जॉन एलिया बेहतरीन गज़ल और शेर


जॉन एलिया के 30 मशहूर शेर


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मैं भी बहुत अजीब हूं इतना अजीब हूं कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं



और तो क्या था बेचने के लिए
अपनी आँखों के ख़्वाब बेचे हैं




कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है




क्या बताऊं के मर नहीं पाता
जीते जी जब से मर गया हूं मैं

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जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है




उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहां के थे ही नहीं




ख़ूब है इश्क़ का ये पहलू भी
मैं भी बर्बाद हो गया तू भी




रोया हूं तो अपने दोस्तों में
पर तुझ से तो हंस के ही मिला हूं




अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूं
ख़ून भी थूका सच मुच थूका और ये सब चालाकी थी


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जौन एलिया के फेमस शेर
यूं जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या



काम की बात मैंने की ही नहीं
ये मेरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं




अपना ख़ाका लगता हूं
एक तमाशा लगता हूं




आज मुझ को बहुत बुरा कह कर
आप ने नाम तो लिया मेरा




जाने उस से निभेगी किस तरह
वो ख़ुदा है मैं तो बंदा भी नहीं



जौन एलिया के मशहूर शेर
जौन एलिया के मशहूर शेर

बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या




हो कभी तो शराब ए वस्ल नसीब
पिए जाऊँ मैं ख़ून ही कब तक




हमें शिकवा नहीं इक दूसरे से
मनाना चाहिए इस पर ख़ुशी क्या




हमारे ज़ख़्म ए तमन्ना पुराने हो गए हैं
कि उस गली में गए अब ज़माने हो गए हैं




हम को यारों ने याद भी न रखा
'जौन' यारों के यार थे हम तो




हम कहां और तुम कहां जानाँ
हैं कई हिज्र दरमियाँ जानाँ




शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई
पर यकीन सबको दिलाता रहा हूं मैं



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जौन एलिया के शेर

बेदिली क्या यूंहीं दिन गुज़र जाएंगे
सिर्फ़ जिंदा रहे हम तो मर जाएंगे




वो जो तामीर होने वाली थी
लग गई आग उस इमारत में
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में




 मुझे अब तुमसे डर लगने लगा है
तुम्हें मुझसे मोहब्बत हो गई क्या




जो हालतों का दौर था, वो तो गुज़र गया
दिल को जला चुके है, सो अब घर जलाइए




मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है
उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी




बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मेरी नींद भी तुम्हारी है



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क्या है जो बदल गई है दुनिया
मैं भी तो बहुत बदल गया हूँ




अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं




क्या सितम है कि अब तेरी सूरत
ग़ौर करने पर याद आती है






जौन एलिया की मशहूर गजलें


कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे


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कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे

उस की याद की बाद ए सबा में और तो क्या होता होगा, 
यूँ ही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे

बंद रहे जिन का दरवाज़ा ऐसे घरों की मत पूछो, 
दीवारें गिर जाती होंगी आँगन रह जाते होंगे

मेरी साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएंगे, 
यानी मेरे बाद भी यानी साँस लिये जाते होंगे

यारो कुछ तो बात बताओ उस की क़यामत बाहों की,
वो जो सिमटते होंगे इन में वो तो मर जाते होंगे

आदमी वक़्त पर गया होगा


आदमी वक़्त पर गया होगा 
वक़्त पहले गुज़र गया होगा 

वो हमारी तरफ़ न देख के भी 
कोई एहसान धर गया होगा 

ख़ुद से मायूस हो के बैठा हूँ 
आज हर शख़्स मर गया होगा 

शाम तेरे दयार में आख़िर 
कोई तो अपने घर गया होगा 

मरहम ए हिज्र था अजब इक्सीर 
अब तो हर ज़ख़्म भर गया होगा 

इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं


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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं 
सब के दिल से उतर गया हूँ मैं 

कैसे अपनी हँसी को ज़ब्त करूँ 
सुन रहा हूँ कि घर गया हूँ मैं 

क्या बताऊँ कि मर नहीं पाता 
जीते-जी जब से मर गया हूँ मैं 

अब है बस अपना सामना दर पेश 
हर किसी से गुज़र गया हूँ मैं 

वही नाज़-ओ-अदा वही ग़म्ज़े 
सर ब सर आप पर गया हूँ मैं 

अजब इल्ज़ाम हूँ ज़माने का 
कि यहाँ सब के सर गया हूँ मैं 

कभी ख़ुद तक पहुँच नहीं पाया 
जब कि वाँ उम्र भर गया हूँ मैं 

तुम से जानाँ मिला हूँ जिस दिन से 
बे तरह ख़ुद से डर गया हूँ मैं 

कू-ए-जानाँ में शोर बरपा है 
कि अचानक सुधर गया हूँ मैं 

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ज़िंदगी क्या है इक कहानी है


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ज़िंदगी क्या है इक कहानी है 
ये कहानी नहीं सुनानी है 

है ख़ुदा भी अजीब यानी जो 
न ज़मीनी न आसमानी है 

है मेरे शौक़-ए-वस्ल को ये गिला 
उस का पहलू सरा-ए फ़ानी है 

अपनी तामीर-ए जान ओ-दिल के लिए 
अपनी बुनियाद हम को ढानी है 

ये है लम्हों का एक शहर-ए-अज़ल 
यों की हर बात ना गहानी है 

चलिए ऐ जान-ए शाम आज तुम्हें 
शमाँ इक क़ब्र पर जलानी है 

रंग की अपनी बात है वर्ना 
आख़िरश ख़ून भी तो पानी है 

इक अबस का वजूद है जिस से 
ज़िंदगी को मुराद पानी है 

शाम है और सहन में दिल के 
इक अजब हुज़न-ए आसमानी है

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जो ज़िंदगी बची है उसे मत गंवाइये


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जो ज़िंदगी बची है उसे मत गंवाइये 
बेहतर ये है कि आप मुझे भूल जाइए 

हर आन इक जुदाई है ख़ुद अपने आप से 
हर आन का है ज़ख़्म जो हर आन खाइए 

थी मश्वरत की हम को बसाना है घर नया 
दिल ने कहा कि मेरे दर-ओ बाम ढाइए 

थूका है मैं ने ख़ून हमेशा मज़ाक़ में 
मेरा मज़ाक़ आप हमेशा उड़ाइए 

हरगिज़ मेरे हुज़ूर कभी आइए न आप 
और आइए अगर तो ख़ुदा बन के आइए 

अब कोई भी नहीं है कोई दिल-मोहल्ले में 
किस-किस गली में जाइए और गुल मचाइए 

इक तौर-ए दह-सदी था जो बे-तौर हो गया 
अब जंतरी बजाइये तारीख़ गाइए 

इक लाल-क़िला था जो मियाँ ज़र्द पड़ गया 
अब रंग-रेज़ कौन से किस जा से लाइए 

शाइर है आप यानी कि सस्ते लतीफ़-गो 
रिश्तों को दिल से रोइए सब को हँसाइए 

जो हालतों का दौर था वो तो गुज़र गया 
दिल को जला चुके हैं सो अब घर जलाइए 

अब क्या फ़रेब दीजिए और किस को दीजिए 
अब क्या फ़रेब खाइए और किस से खाइए 

है याद पर मदार मेरे कारोबार का 
है अर्ज़ आप मुझ को बहुत याद आइए 

बस फ़ाइलों का बोझ उठाया करें जनाब 

मिस्रा ये -जौन- का है इसे मत उठाइए 

हमारे शौक के आंसू


हमारे शौक के आंसू दो, खुशहाल होने तक,
तुम्हारे आरज़ू केसो का सौदा हो चुका होगा

अब ये शोर-ए-हाव हूँ सुना है सारबानो ने,
वो पागल काफिले की ज़िद में पीछे रह गया होगा

है निस-ऐ-शब वो दिवाना अभी तक घर नहीं आया,

किसी से चन्दनी रातों का किस्सा छिड़ गया होगा

उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या?


उम्र गुज़रेगी इम्तहान में क्या,
दाग ही देंगे मुझको दान में क्या

मेरी हर बात बेअसर ही रही,
नुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या

बोलते क्यो नहीं मेरे अपने,
आबले पड़ गये ज़बान में क्या

मुझको तो कोई टोकता भी नहीं,
यही होता है खानदान मे क्या

अपनी महरूमिया छुपाते है,
हम गरीबो की आन-बान में क्या

वो मिले तो ये पूछना है मुझे,
अब भी हूँ मै तेरी अमान में क्या

यूँ जो तकता है आसमान को तू,
कोई रहता है आसमान में क्या

है नसीम-ऐ-बहार गर्दालूद,
खाक उड़ती है उस मकान में क्या

ये मुझे चैन क्यो नहीं पड़ता,
एक ही शख्स था जहान में क्या

सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई


सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई,
क्यूँ चीख़ चीख़ कर न गला छील ले कोई

साबित हुआ सुकून-ए-दिल-ओ-जाँ कहीं नहीं,
रिश्तों में ढूँढता है तो ढूँढा करे कोई

तर्क-ए-तअल्लु-क़ात कोई मसअला नहीं,
ये तो वो रास्ता है कि बस चल पड़े कोई

दीवार जानता था जिसे मैं वो धूल थी,
अब मुझ को एतिमाद की दावत न दे कोई

मैं ख़ुद ये चाहता हूं कि हालात हूं ख़राब,
मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई

ऐ शख़्स अब तो मुझ को सभी कुछ क़ुबूल है,
ये भी क़ुबूल है कि तुझे छीन ले कोई

हां ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूं,
आख़िर मिरे मिज़ाज में क्यूँ दखल दे कोई

इक शख़्स कर रहा है अभी तक वफ़ा का ज़िक्र,
काश उस ज़बां-दराज़ का मुंह नोच ले कोई

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1 Comments

  1. Wah bhai maja aa gaya jhon elia sahab ki best shayari

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