Saturday, September 14, 2019

हिंदी दिवस पर पढ़िए बड़े कवियों की प्रसिद्ध कविताएं | hindi diwas poem, kavita



hindi diwas poem (हिंदी पर कवितायें) नमस्कार दोस्तों- प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है| पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था| संविधान सभा के निर्णय द्वारा हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया,

हिंदी हमारे देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है| हिंदी के कई कवियों ने अपनी भाषा को सम्मान प्रेम व हिंदी का महत्व कविताओं के माध्यम से प्रसारित किया है|

तो दोस्तों-आज का यह आर्टिकल हिंदी के कुछ बड़े कवियों की चुनिंदा कविताओं पर आधारित है| hindi diwas poem


हिंदी पर कवितायें / hindi diwas kavita

 

निज भाषा उन्नति / हिंदी पर कवितायें



निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय। निज भाषा उन्नति बिना, कबहुं न ह्यैहैं सोय लाख उपाय अनेक यों भले करे किन कोय इक भाषा इक जीव इक मति सब घर के लोग तबै बनत है सबन सों, मिटत मूढ़ता सोग और एक अति लाभ यह, या में प्रगट लखात निज भाषा में कीजिए, जो विद्या की बात। तेहि सुनि पावै लाभ सब, बात सुनै जो कोय यह गुन भाषा और महं, कबहूं नाहीं होय विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार। भारत में सब भिन्न अति, ताहीं सों उत्पात विविध देस मतहू विविध, भाषा विविध लखात। सब मिल तासों छांड़ि कै, दूजे और उपाय उन्नति भाषा की करहु, अहो भ्रातगन आय।

-भारतेन्दु हरिश्चन्द्र-

मेरी भाषा में तोते भी राम राम / hindi diwas poem



मेरी भाषा में तोते भी राम राम जब कहते हैं,
मेरे रोम रोम में मानो सुधा-स्रोत तब बहते हैं।
सब कुछ छूट जाय मैं अपनी भाषा कभी न छोड़ूंगा,
वह मेरी माता है उससे नाता कैसे तोड़ूंगा ।


-मैथिलीशरण गुप्त-

हिन्दी मेरे रोम-रोम में / hindi diwas poem, kavita



हिन्दी मेरे रोम-रोम में,
हिन्दी में मैं समाई हूँ,
हिन्दी की मैं पूजा करती,
हिन्दोस्तान की जाई हूँ

सबसे सुन्दर भाषा हिन्दी,
ज्यों दुल्हन के माथे बिन्दी,
सूर, जायसी, तुलसी कवियों की,
सरित-लेखनी से बही हिन्दी

हिन्दी से पहचान हमारी,
बढ़ती इससे शान हमारी,
माँ की कोख से जाना जिसको,
माँ,बहना, सखि-सहेली हिन्दी

निज भाषा पर गर्व जो करते,
छू लेते आसमाँ न डरते,
शत-शत प्रणाम सब उनको करते,
स्वाभिमान-अभिमान है हिन्दी

हिन्दी मेरे रोम-रोम में,
हिन्दी में मैं समाई हूँ,
हिन्दी की मैं पूजा करती,


हिन्दोस्तान की जाई हूँ|

मेरा अनुरोध है / hindi diwas poem in hindi for students



मेरा अनुरोध है- 
भरे चौराहे पर करबद्ध अनुरोध 
कि राज नहीं- भाषा
भाषा- भाषा- सिर्फ़ भाषा रहने दो
मेरी भाषा को।

इसमें भरा है
पास-पड़ोस और दूर-दराज़ की
इतनी आवाजों का बूँद-बूँद अर्क
कि मैं जब भी इसे बोलता हूँ
तो कहीं गहरे
अरबी तुर्की बांग्ला तेलुगु
यहाँ तक कि एक पत्ती के
हिलने की आवाज़ भी
सब बोलता हूँ ज़रा-ज़रा
जब बोलता हूँ हिंदी


- केदारनाथ सिंह-

हिन्दी इस देश का गौरव है / hindi diwas poem



हिन्दी इस देश का गौरव है, हिन्दी भविष्य की आशा है
हिन्दी हर दिल की धड़कन है, हिन्दी जनता की भाषा है
इसको कबीर ने अपनाया
मीराबाई ने मान दिया
आज़ादी के दीवानों ने
इस हिन्दी को सम्मान दिया
जन-जन ने अपनी वाणी से हिन्दी का रूप तराशा है|

-देवमणि पांडेय-

वह हिंदी है / hindi diwas ke liye kavita



एक डोर में सबको जो है बाँधती
वह हिंदी है,
हर भाषा को सगी बहन जो मानती
वह हिंदी है
भरी-पूरी हों सभी बोलियां
यही कामना हिंदी है,
गहरी हो पहचान आपसी
यही साधना हिंदी है

-गिरिजा कुमार माथुर-

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